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बिहार में राज्यसभा चुनाव: एनडीए की क्लीन स्वीप की संभावना, विपक्ष को पांचवीं सीट के लिए जोड़‑तोड़ करनी होगी

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पटना। बिहार में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव की सियासत इन दिनों गरमाई हुई है। राज्य की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने विधायकों को लेकर रणनीति बनाने और बैठकें आयोजित करने में जुटे हुए हैं। इस बार एनडीए ने पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और सत्ता पक्ष के नेताओं का दावा है कि सभी सीटों पर उनकी जीत तय है।
एनडीए की स्थिति मजबूत
बिहार सरकार के मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एनडीए के सभी दलों के नेता पूरी तरह आश्वस्त हैं। उनके अनुसार गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या में विधायक हैं और किसी भी सीट की जीत को लेकर कोई संशय नहीं है। चौधरी ने बताया कि चुनाव होने तक सभी विधायक पटना में रहेंगे और एक-दूसरे से मिलना-जुलना भी चलता रहेगा, लेकिन इससे वोट के गणित पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
विपक्ष में घबराहट का माहौल
मंत्री विजय चौधरी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि इस समय विपक्षी खेमे में घबराहट है। कुछ विधायक खुले तौर पर घूम रहे हैं, जबकि कुछ को नजरबंद रखने जैसी खबरें भी आ रही हैं। उन्होंने साफ किया कि यह स्थिति विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है।
एआईएमआईएम के वोटिंग फैसले पर प्रतिक्रिया
राजद उम्मीदवार को एआईएमआईएम के विधायकों द्वारा समर्थन देने की चर्चाओं पर चौधरी ने कहा कि किसी से मिलना और वोट देना अलग‑अलग बातें हैं। अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए ऐसी खबरों पर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
वोटिंग गणित और सीटों का परिदृश्य
बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं। किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। वर्तमान संख्या बल के अनुसार एनडीए के पास लगभग 202 विधायक हैं, जिससे वह आसानी से चार सीटें जीत सकता है। लेकिन पांचवीं सीट के लिए उन्हें कुछ अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है।
वहीं, राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास करीब 35 विधायक हैं। इस आधार पर उन्हें भी जीत के लिए अन्य दलों से समर्थन जुटाना पड़ेगा। इसी वजह से चुनाव से पहले सियासी जोड़‑तोड़ और गठबंधन चर्चा तेज हो गई है।
निष्कर्ष
राज्यसभा चुनाव के इस महत्वपूर्ण मौके पर बिहार की सियासत में हलचल और बढ़ गई है। एनडीए की जीत लगभग तय दिखाई दे रही है, लेकिन पांचवीं सीट को लेकर विपक्षी दलों की रणनीति और सहयोग की दिशा पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। इस चुनाव के परिणाम बिहार की राजनीतिक दिशा और आगामी सियासी समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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